परिचय

गोंद कतीरा एक प्राकृतिक औषधीय गोंद है, जिसका उपयोग आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति में लंबे समय से किया जाता रहा है। यह एक कांटेदार वृक्ष से प्राप्त होता है और अपनी ठंडी तासीर के कारण विशेष रूप से गर्म मिजाज वाले व्यक्तियों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर को ठंडक देने और कई आंतरिक रोगों से बचाने में सहायक होता है।


गोंद कतीरा के औषधीय गुण

  • रंग : सफेद या हल्का पीला

  • स्वाद : फीका और हल्का खट्टा

  • स्वरूप : कांटेदार वृक्ष से प्राप्त प्राकृतिक गोंद

  • स्वभाव (तासीर) : ठंडा

  • तुलना : बबूल के गोंद और लौकी के बीज से

गोंद कतीरा शरीर के खून को गाढ़ा करता है और हृदय की कठोरता को दूर करने में सहायक होता है। यह आंतों की जलन को शांत कर शरीर को बल प्रदान करता है।
यह खांसी, कफ, सांस संबंधी रोगों में लाभ देता है और छाती की खरखराहट तथा फेफड़ों के घावों को ठीक करने में मदद करता है।
गोंद कतीरा विष को उतारने में भी उपयोगी है, विशेषकर गर्म तासीर वाले लोगों के लिए।


गोंद कतीरा की सेवन मात्रा

गोंद कतीरा का सेवन सामान्यतः 4 ग्राम की मात्रा में करना सुरक्षित माना जाता है। रोग की स्थिति में मात्रा वैद्य की सलाह अनुसार बढ़ाई जा सकती है।


गोंद कतीरा के फायदे और उपयोग

1. जीभ की जलन और सूजन

10–20 ग्राम गोंद कतीरा रात में पानी में भिगो दें। सुबह उसी पानी में मिश्री मिलाकर पीने से जीभ की जलन और सूजन समाप्त होती है।

2. मूत्र रोग

गोंद कतीरा को फुलाकर मिश्री के साथ शर्बत बनाकर सुबह-शाम पीने से पेशाब में जलन और अन्य मूत्र विकार ठीक होते हैं।

3. मासिक धर्म संबंधी समस्याएं

गोंद कतीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में पीसकर 2 चम्मच कच्चे दूध के साथ सेवन करने से मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है।

4. कौआ गिरना

गोंद कतीरा को पानी में फुलाकर मिश्री वाले शर्बत के साथ सुबह-शाम सेवन करने से कौआ बढ़ने की समस्या में लाभ मिलता है।

5. पेचिश

6 ग्राम गोंद कतीरा को 250 मिली पानी में भिगोकर सुबह चीनी मिलाकर पीने से पेचिश ठीक होती है।

6. शरीर की अधिक गर्मी

गोंद कतीरा का नियमित सेवन शरीर की अतिरिक्त गर्मी, जलन और बेचैनी को दूर करता है।

7. रक्तप्रदर

रात को भिगोया हुआ गोंद कतीरा सुबह मिश्री के साथ सेवन करने से रक्तप्रदर में आराम मिलता है।

8. सिर दर्द

मेंहदी के फूल और गोंद कतीरा को भिगोकर मिश्री के साथ पीने से सिर दर्द, जलन और बाल झड़ने की समस्या कम होती है।

9. हाथ-पैरों की जलन

रात में भिगोया हुआ गोंद कतीरा सुबह चीनी मिलाकर पीने से हाथ-पैरों की जलन दूर होती है।

10. गले की गांठ

गोंद कतीरा को मिश्री मिले पानी के साथ सुबह-शाम पीने से गले की गांठ और सूजन में राहत मिलती है।

11. कंठमाला

गोंद कतीरा और नानख्वा का लेप लगाने व शर्बत बनाकर पीने से कंठमाला में लाभ होता है।

12. स्वरयंत्र की जलन

गोंद कतीरा को पहले भिगोकर शर्बत के रूप में सेवन करने से आवाज बैठना और जलन ठीक होती है।

13. विन्सेंट एनजाइना

गोंद कतीरा का नियमित सेवन इस रोग में आराम प्रदान करता है।

14. गले की पेशियों का पक्षाघात

गोंद कतीरा को फुलाकर मिश्री के साथ सेवन करने से गले की पेशियों में शक्ति आती है।


गोंद कतीरा के नुकसान (Side Effects)

अधिक मात्रा में गोंद कतीरा का सेवन करने से पेट में गोटी बनने की समस्या हो सकती है। इसलिए सीमित मात्रा में ही सेवन करें।


दोषों को दूर करने वाला

अनीसून (सौंफ) का उपयोग गोंद कतीरा के दोषों को संतुलित करने में सहायक होता है।

Gond Katira – Karaya Gond – Tragacanth Gum

अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक उद्देश्य के लिए प्रस्तुत की गई है। इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प बनना नहीं है। किसी भी जड़ी-बूटी, आयुर्वेदिक, यूनानी या हर्बल उत्पाद का उपयोग करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किसी योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें। लेखक या वेबसाइट इस जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी प्रयोग के लिए उत्तरदायी नहीं होगी।


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