गुणों की दृष्टि से नींबू अत्यंत लाभकारी फल माना जाता है। गर्मी के मौसम में नींबू का शरबत बनाकर सेवन करना विशेष रूप से लाभदायक होता है। नींबू का रस स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पाचन में सहायक भी है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होता है। खड़े रूप में भी नींबू कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है।
नींबू में रक्त की अम्लता को कम करने का विशिष्ट गुण पाया जाता है। यह त्रिदोष, विशेषकर वात से संबंधित रोगों, मंदाग्नि, कब्ज तथा हैजा जैसी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। नींबू में कृमिनाशक और सड़नरोधी गुण भी होते हैं, जिससे यह रक्त और त्वचा से जुड़े विकारों में सहायक होता है। इसकी प्राकृतिक खटास शरीर में ठंडक उत्पन्न करती है, जो गर्मी से बचाव में मदद करती है।
नींबू में साइट्रिक एसिड की मात्रा लगभग 7.5 प्रतिशत होती है। हालांकि पाचन के बाद यह क्षारीय स्वरूप में परिवर्तित हो जाता है, जिससे रक्त में भोजन के कारण उत्पन्न होने वाली अम्लता दूर होती है और रक्त शुद्ध होता है। नींबू में विटामिन C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसलिए यह रक्तपित्त, स्कर्वी (विटामिन C की कमी से होने वाला रोग) जैसे विकारों में अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
सावधानी:
सूजन, जोड़ों के दर्द और सफेद दाग जैसी स्थितियों में नींबू का सेवन नहीं करना चाहिए।
औषधीय प्रयोग (Medicinal Uses of Lemon)
मुँह का सूखना
ज्वर की अवस्था में शरीर की गर्मी बढ़ने पर जब लार ग्रंथियाँ निष्क्रिय हो जाती हैं और मुँह सूखने लगता है, तब नींबू का रस पीने से ये ग्रंथियाँ पुनः सक्रिय होती हैं और मुँह की शुष्कता दूर होती है।
पित्तप्रकोप व उदर रोग
पित्त की अधिकता से उत्पन्न रोगों में नींबू अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अम्लपित्त की स्थिति में सामपित्त के पाचन हेतु नींबू के रस में सेंधा नमक मिलाकर सेवन कराया जाता है। इससे अफरा, उल्टी, पेट के कीड़े, कब्ज और गले से संबंधित रोगों में राहत मिलती है।
अपच और अरुचि
नींबू के रस में मिश्री और एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर शरबत बनाकर पीने से जठराग्नि प्रबल होती है, भूख बढ़ती है और भोजन का पाचन बेहतर होता है।
पेटदर्द व मंदाग्नि
एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस, 2–3 चम्मच अदरक का रस और मिश्री मिलाकर सेवन करने से विभिन्न प्रकार के पेटदर्द में आराम मिलता है, पाचन शक्ति बढ़ती है और भूख खुलकर लगती है।
मोटापा और कब्ज
गुनगुने पानी में एक चम्मच नींबू का रस और 2–3 चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है, पाचन सुधरता है और पुरानी कब्ज से राहत मिलती है।
दाँतों से खून आना व त्वचा रोग
नींबू के रस में इमली के बीज पीसकर लगाने से दाद और खाज जैसी त्वचा समस्याओं में लाभ होता है। जिन रोगों में स्त्राव नहीं होता, जैसे कृमि, खुजली या कुष्ठ के प्रारंभिक लक्षण, वहाँ नींबू के रस का बाहरी प्रयोग लाभदायक माना गया है।
त्वचा की शुष्कता और खुजली
नींबू के रस में नारियल का तेल मिलाकर शरीर की मालिश करने से त्वचा की रूखापन, खुजली और अन्य त्वचा विकारों में राहत मिलती है।
बालों की रूसी और सिर की फोड़े-फुंसी
नींबू के रस और सरसों के तेल को समान मात्रा में मिलाकर सिर पर लगाने से रूसी में आराम मिलता है। बाद में दही से सिर धोने पर कुछ ही दिनों में दारुणक (रूसी) रोग, खुजली और सिर की फुंसियों में सुधार देखा जाता है।
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